क्या सत्तारूढ़ दल इस बार बिहार से कुछ महिला सांसद देगा?

0
101

आज अंतराष्ट्रीय महिला दिवस है। नारी सशक्तिकरण को ले कर माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गंभीरता से पूरा देश वाकिफ है। पर फिर भी बिहार से मात्र 3 महिला हैं संसद में। ऐसे में नारी सशक्तिकरण का मुद्दा राजनीति में मात्र एक छलावा तो नहीं? क्या हमारा बिहार कुछ और सशक्त महिला नेतृत्व आने वाले आम चुनाव में देश को नहीं दे सकता? चलिए देखते हैं यह रिपोर्ट।

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका:-

यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमन्ते तत्र देवता|
अर्थात, जहां महिलाओं की पूजा की जाती है, वहां पर भगवान प्रसन्न होते हैं, और “जहाँ महिलाओं का सम्मान नहीं होता , उनका हर प्रयास विफल हो जाता है”

राजनीति में महिलाओं की भूमिका एक बहुत व्यापक प्रभाव है जो न सिर्फ वोटिंग अधिकार,वयस्क फ्रैंचाइजी और सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना करने भर पर निर्भर करता है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया, राजनीतिक सक्रियता, राजनीतिक चेतना आदि में भागीदारी से संबंधित है। हालांकि भारत में महिलाएं मतदान में भाग लेती हैं, बड़ी संख्या में निचले स्तर पर सार्वजनिक कार्यालयों और राजनीतिक दलों में प्रस्तुत हैं , लेकिन भारतीय राजनीति के उच्च राजनीतिक स्तरों के बीच समानता के कुछ अपवादों के अलावा महिलाओ की उपस्थिति नगण्य है।।

क्या इस लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल के तरफ से होनहार और सशक्त महिलाओं को टिकट दिया जाएगा अथवा नहीं??

क्योंकि जहां तक बिहार की बात आती है,तो आप देख ले कि बिहार में 40 सांसदो में से मात्र 3 सांसद,जिसमें से एक सांसद रंजीता रंजन जो कांग्रेस से है, दूसरी वीणा देवी जो लोजपा से है और तीसरी रमा देवी जो कि भाजपा से है, लेकिन 1 सांसद को छोड़कर दो ऐसी सांसद हैं जो ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है उन्हें राजनीति का मतलब भी पता नहीं है फिर भी वो सांसद हैं, क्या बिहार में पढ़ी लिखी महिलाओं की कमी है या उन्हें राजनीति में आने का अवसर नहीं मिल पाता है…. तो क्या हम मान ले कि आने वाले लोकसभा चुनाव में जदयू महिला सांसद के रूप में वृद्धि होगी!क्योंकि जदयू इस समय बिहार में सत्तारूढ़ दल का प्रतिनिधित्व करती हैं…..क्या इस बार के लोकसभा चुनाव में जदयू किसी पढ़ी लिखी और होनहार महिलाओं को टिकट देगी या सिर्फ 50 प्रतिशत आरक्षण उनका दिखावा है,क्योंकि मुख्यमंत्री के पार्टी से अभी तक कोई महिला सांसद नहीं है……क्या इस बार पार्टी के तरफ से महिलाओं को सांसद में भेजने की तैयारी है या नहीं…..क्योंकि मुख्यमंत्री जी ने जिस प्रकार से बिहार में महिलासशक्तिकरण का मिशाल पेश किया हुआ है जिसमें कहीं न कही उसमें सफल भी हुए हैं,जैसे कि जिस प्रकार से उन्होंने लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए और ज्यादा से ज्यादा स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए पोशाक और साइकल वितरण की जो योजना बनाई है उससे प्रदेश की लड़कियों के अंदर पढ़ाई को लेकर बहुत ही अच्छा संदेश गया है…..

जिस प्रकार से बिहार में उन तमाम महिलाओं की आवाज बनकर सामने आए की शराब पीकर उनका पति रोज घर में आता है और मार पीट करता है न जाने कितनी महिलाएं इन सभी का शिकार हुई थी, लेकिन जिस प्रकार से आदरणीय मुख्यमंत्री जी ने शराब बंदी का जो निर्णय लिया वो बेहद ही ऐतिहासिक है,क्योंकि शराब से न जाने कितनी ज़िन्दगी बर्बाद हो गई, जिस तरह से इस पर सख्त कानून बनाकर उन तमाम महिलाओं के दिल में जो जगह बनाई है शायद वो कभी भूल पाएंगी क्योंकि मुख्यमंत्री ने उन सभी महिलाओं के जीवन में एक नई उम्मीद और नई किरण जगाने का कार्य किया है, इसके लिए उन्हें बधाई और साधुवाद।। लेकिन सबसे बड़ी उदासीनता तब दिखाई देती है जब माननीय कहते हैं कि हम राजनीति में महिलाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं फिर बात वही घूम फिर कर आती है कि अगर आप महिलाओं के लिए इतनी चिंता करते हैं तो क्या राजनीति में युवा महिलाओं को मौका देंगे या सिर्फ यह दिखावा बन कर महिलाओं के इर्दगिर्द घूमते रहेगा।।

हालाँकि भारत में महिलाओ के साथ व्यवहार के संबंध में सबसे खराब रिकॉर्ड है। कुपोषित, दबी कुचली,अशिक्षित और भेदभाव के साथ साथ भारतीय महिलाओं के सामने ढेरों बाधाएं हैं…यहां तक ​​कि जन्म एक बाधा है, ग्रामीण इलाकों में व्यापक रूप से मादा गर्भधारण के कारण। महिला नेता,शहरी नारीवादियों की परियोजना पर नाराजगी और क्रोध के बजाय, अवसरों और लागतों के बारे में स्पष्ट दिमाग वाले यथार्थवाद के साथ बात करतीं हैं। कई महिलाओं के लिए,एक चिंता का विषय यह भी बन जाता है कि वो होती तो है जनप्रतिनिधि लेकिन उन्हें वो कार्य करने नहीं दिया जाता है क्योंकि उनके बदले उनका पति कार्य करता है उन्हें सिर्फ कठपुतलियों की तरह नाचता है इस देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि हम महिलाओं को उसे अपनी कार्य को आज़ादी से करने से रोकते नजर आते हैं।।तो हम यह मान ले कि आज भी महिलाओं के लिए राजनीति में आना एक रोड़ा बना हुआ है क्योंकि जब वो खुद से कोई निर्णय नहीं ले सकती हैं,तो फिर कैसे हम महिलाओं को शक्तिशाली बनाएंगे जब उनका कार्य उनका पति ही देखेगा यह सोचनीय विषय है।।

भारत में राजनीति कई दशकों से दूषित हो गई है , शायद यह राजनीति से जुड़े गंदगी है जो वास्तव में प्रतिभाशाली और योग्य महिलाओं को राजनीति से दूर रखती है। यद्यपि आज भारतीय राजनीति के सर्वोच्च स्तर पर हमारे पास कई महिला राजनेता हैं। एक तरफ, भारत संसद में महिलाओं की संख्या (9.1%) के संबंध में सबसे कम आता है। यहां तक ​​कि संयुक्त अरब अमीरात, 22.5% के साथ, अधिक महिला प्रतिनिधियों के साथ आगे है । जब हम भारतीय राजनैतिक व्यवस्था के जमीनी स्तर पर एक वास्तविकता जांच करते हैं तो हम आसानी से महिलाओं की भूमिका एक वोट बैंक के लिए प्रतिबंधित कर सकते हैं।

दुनिया भर में हाल के वर्षों में राजनीति में महिलाओं का एक नया आयाम सामने आया है। अधिक से अधिक महिलाएं अब राजनीति में प्रवेश कर रही हैं। परंपरागत राजनीति ने पुरुष की चिंताओं पर ज़ोर दिया और इसलिए महिलाओं को राजनीति में अनुपस्थित रखा गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here