जिउतिया व्रत आते ही मड़ुआ बना इंटरनेशनल ब्रांड, दो से ढ़ाई सौ रुपये किलो तक पहुंची कीमत

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Patna: इतिहास बन चुकी मड़ुआ की खेती की सरकार को फिर याद आई है। दरअसल, इसकी फसल में सेहत, कीमत और स्वाद निहित है, लेकिन धान-गेहूं पैदा करने की होड़ में लोग इसे लगाना भूल गए। अनिश्चित मानसून के बावजूद किसानों को लाभ देने वाले मड़ुआ को अब प्रोत्साहित करने की योजना बन गई है। पटना, नालंदा और भोजपुर जिले में इस बार मड़ुआ की रोटी सिर्फ जीउतिया (पुत्र दीर्घायु व्रत) के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य लाभ के लिए सुलभ हो सकेगी।





जीउतिया व्रत के मौके पर दो से ढ़ाई सौ रुपये किलो बिकने वाला मड़ुआ अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए ब्रांड बन चुका है। सेहत के प्रति गंभीर लोगों के लिए बिस्कुट कंपनियां अब आटा-मैदा से कहीं ज्यादा रागी (मड़ुआ) मिश्रित बिस्कुट बाजार में उतार चुकी है।

रागी मिश्रित बिस्कुट से संतोष करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है कि अब पटना के गांवों में मड़ुआ मिल सकेगा। 1120 हेक्टेयर में फसल लगाने की योजना मानसून की अनिश्चितता की स्थिति में जुलाई से अक्टूबर के बीच पटना जिले में 120 हेक्टेयर में मड़ुआ की फसल लगाने की योजना है।




इसी तरह भोजपुर और नालंदा में भी प्रयोग के तौर पर 25-25 हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसकी खेती का लाभ है कि दलहन फसल लगाने तक कटनी हो जाती है। 30 अक्टूबर के बाद दलहन फसल को आसानी से लगाना संभव हो सकेगा। औषधीय गुण से भरपूर 11 सामान्य अनाज की तुलना मड़ुआ में सबसे अधिक कैल्सियम की मात्र पाई जाती है।

मधुमेह और रक्तचाप के रोगियों के लिए यह फायदेमंद माना जाता है। मड़ुआ के औषधीय गुण को देखते इसके खाद्य उत्पाद बाजार में तेजी से आ रहे हैं।




खरीफ सीजन में तिलहन सरसों, राई और तीसी प्रमुख तिलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए खरीफ सीजन में तिल, अंडी (रेड़ी), सूर्यमुखी और मूंगफली की खेती लाभदायक हो सकेगी। कम वर्षा और सिंचाई वाले तिलहन पैदाकर किसान कृषि को लाभकारी बना सकेंगे।

Source: Live Bihar

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