भगवान विष्णु का रहस्यमयी और अनोखा धाम, जहां 6 महीने इंसान तो 6 महीने देवता करते हैं पूजा

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उत्तराखंड के श्रीधाम बद्रीनाथ का इस समय कुदरत द्वारा जबरदस्त श्रृंगार किया गया है। भगवान विष्णु का सर्वश्रेष्ठ धाम बद्रीनाथ इस समय डेढ़ से दो फीट बर्फ की मोटी चादर की आगोश में है। सर्दी में भगवान के कपाट बंद हैं, मान्यता है इस समय भगवान बद्रीश की पूजा अर्चना भगवान नारद द्वारा होती है।

ऐसी मान्यता है क‍ि इस समय भगवान बद्रीविशाल मनुष्य को दर्शन नहीं देते हैं बल्क‍ि शीतकाल में यहां दर्शन देवताओं के लिए होते हैं। इस समय यहां देवताओं की पूजा-पाठ चल रही होती है। यह पहला धाम है जहां 6 महीने मनुष्य पूजा करता है और 6 महीने देवताओं द्वारा पूजा की जाती है।

इस समय यहां देवताओं का समय चल रहा है और कपाट बंद है लेकिन कुदरत मेहरबान है। भगवान के धाम का शृंगार रोजाना बर्फवारी से हो रहा है। पूरे धाम को एकदम सफेद डेढ़ फीट मोटी बर्फ की चादर ने ढक ल‍िया है। कुदरत ने धाम को इस तरह सजाया है जैसी कभी लोगों द्वारा भी बद्रीनाथ धाम में सजावट नहीं की गई होगी।

बद्रीनाथ धाम एकदम सुंदर सफेद मखमली बर्फ की चादर से ढका हुआ है। यही कुदरत और देवताओं की मेहरबानी है कि शीतकाल में धाम में मनुष्य का प्रवेश वर्जित रहता है लेकिन कुदरत यहां मेहरबान रहती है। इस समय यहां ITBP और सेना मंदिर की सुरक्षा में लगे जवान तैनात होते हैं।

चीन से सटी सीमा पर अंतिम पोस्ट माणा में देश की रक्षा में लगे जवान रहते हैं। वहीं, बद्रीनाथ में मन्दिर की सुरक्षा में तैनात पुल‍िस के कुछ जवान रहते हैं। बद्रीनाथ धाम जाने के लिए हनुमान चट्टी से आगे के लिए प्रशासन की विशेष अनुमति चाहिए होती है, तब ही कोई आम आदमी बद्रीनाथ जा सकता है।

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