लालू यादव को चुनौती देकर इस IAS अफसर ने बिहार की राजनीति में मचा दी थी खलबली, दिया था खुलेआम चैलेंज

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PATNA : लालू यादव को सत्ता की हनक के लिए जाना जाता है। 1990 से 2005 तक बिहार की सत्ता और नौकरशाही पर लालू यादव का दबदबा रहा था। 1997 में राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी शासन का रिमोट कंट्रोल लालू यादव के पास ही था। लेकिन इस दौरान एक IAS अधिकारी ने लालू यादव की संविधानेतर सत्ता को चुनौती दे कर खलबली मचा दी थी। इस IAS अफसर का नाम है अनूप मुखर्जी। अब वे रिटायर हो चुके हैं।




अनूप मुखर्जी ,1974 बैच के IAS अधिकारी, साधारण कद-काठी लेकिन इरादों से बहुत मजबूत। जो वाजिब लगा वही किया। सन 2000 में राबड़ी देवी कांग्रेस के सहयोग से फिर मुख्यमंत्री बन गयी थीं। अनूप मुखर्जी उस समय सचिव स्तर के अधिकारी थे। कहने को तो राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं लेकिन लालू यादव प्रॉक्सी सीएम की तरह पेश आते थे। जब मुख्यमंत्री राबड़ी देवी सचिव स्तर के अधिकारियों की बैठक बुलातीं तो लालू यादव उसका संचालन करने लगते। IAS अफसरों को सीधे निर्देश भी देने लगते। उनके कामकाज पर टिपण्णी करते। कई बार फटकार भी लगाते। कुछ अफसर लालू यादव की इस असंवैधानिक ऑथोरिटी से नाखुश थे। वे असहज तो थे लेकिन कुछ बोल नहीं पाते।

इस व्यस्था से अनूप मुखर्जी बहुत असहज हो गये थे। इस गलत प्रथा को उन्होंने अपने आत्मसम्मान के खिलाफ माना। अनूप मुखर्जी ने तत्कालीन मुख्य सचिन मुकुंद प्रसाद को एक कड़क चिट्ठी लिखी- मैं उन बैठकों में आने के लिए सक्षम नहीं हूं जो किसी असंवैधानिक सत्ता द्वारा ली जाती है। इस स्थिति का सामना करना मेरे आत्मसम्मान के खिलाफ है। लालू प्रसाद के रुतबे को देखते हुए यह बहुत ही साहसिक चिट्ठी थी। पहली बार किसी अफसर ने किंगमेकर माने जाने वाले लालू यदव को चुनौती दी थी। सत्ता के गलियारे में खलबली मच गयी। अनूप मुखर्जी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्हें संट कर दिया गया।




2005 में जब नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज हुए तो अनूप मुखर्जी को अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिला। नीतीश के गुड गवर्नेंस को जमीन पर उतारने वाली टीम में अनूप मुखर्जी भी शामिल थे। 2009 में नीतीश ने अनूप मुखर्जी को बिहार का मुख्य सचिव बनाया था।




अनूप मुखर्जी का स्वभाव गंभीर था । खाली समय में किताबें पढ़ते। पार्टी-फंक्शन से दूर ही रहते थे। नीतीश कुमार अनूप मुखर्जी से बहुत प्रभावित थे। 2011 में अनूप मुखर्जी के रिटायर होने के कुछ दिनों पहले नीतीश कुमार ने उनको BPSC का चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि इससे उनकी निष्पक्ष छवि धूमिल हो जाएगी।

Source : Live Bihar

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