बाल गोपाल की मूर्ति घर में रखी है तो इनकी पूजा में कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें

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17 मार्च को रंगभरी एकादशी है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी भी कहा जाता है। हर माह दो एकादशियां आती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। अभी फाल्गुन मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है। रविवार को शुक्ल पक्ष की एकादशी है। उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी और ज्योतिर्विद पं. सुनील नागर के अनुसार एकादशी पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा करनी चाहिए। श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा भी इस तिथि पर विशेष रूप से करनी चाहिए। अगर आपने भी मंदिर में इनकी मूर्ति रखी है तो एकादशी पर इनकी पूजा जरूर करें।

> बाल गोपाल की पूजा रोज नियमित रूप से करनी चाहिए। यहां जानिए लड्डू गोपाल की पूजा से जुड़ी खास बातें…
> सुबह-शाम बाल गोपाल को भोग लगाते समय प्रसाद में तुलसी के पत्ते जरूर रखें। तुलसी के बिना भगवान भोग नहीं लगाना चाहिए।
> बाल गोपाल की पूजा से पहले आचमन करना चाहिए। इसके लिए पहले खुद के हाथ साफ पानी से धोएं, इसके बाद श्रीकृष्ण के हाथों के लिए जल अर्पित करें। इसके लिए फूलों वाले सुगंधित पानी का उपयोग करें।
> पूजा में श्रीकृष्ण की मूर्ति को आसन पर बिठाएं। आसन का रंग चमकीला होना चाहिए। जैसे लाल, पीला, नारंगी।
> जिस बर्तन में भगवान श्रीकृष्ण के पैर धोए जाते हैं, उसे पाद्य कहा जाता है। पूजा से पहले पाद्य में स्वच्छ जल और फूलों की पंखुड़ियां डालें और उससे भगवान के चरणों को धोएं।
> दूध, दही, घी, शहद और चीनी को एक साथ मिलाकर पंचामृत बनाएं और तुलसी के पत्ते डालकर भोग लगाएं।
> पूजा में उपयोग होने वाली दूर्वा घास, कुमकुम, चावल, अबीर, सुगंधित फूल और शुद्ध जल को पंचोपचार कहा जाता है।
> श्रीकृष्ण की पूजा में जो भोग लगाया जाता है, उसमें ताजे फल, मिठाइयां, लड्डू, मिश्री, खीर, तुलसी के पत्ते और फल शामिल करें।
> बाल गोपाल की पूजा में गाय के दूध से बने घी का उपयोग करें।

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