नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय महापर्व चैती छठ शुरू, खरना पूजा कल

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चार दिवसीय महापर्व चैती छठ का अनुष्ठान आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। आज सुबह व्रतियों ने गंगा नदी में स्नान किया और गंगाजल भरकर घर ले गईं। गंगाजल से व्रतियों ने नहाय खाय का प्रसाद कद्दू भात बनाया और भगवान को नमन कर प्रसाद को ग्रहण किया। उसके बाद परिवार के बाकी लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किया। कल छठव्रती खरना की पूजा करेंगी, गुरूवार को व्रती भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य देंगी। फिर शुक्रवार को उदयीमान भगवान सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व संपन्न हो जाएगा।

 

सूर्योपासना का पवित्र पर्व है छठ

सूर्य की उपासना का पर्व छठ हिन्दू नववर्ष के पहले माह चैत्र के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इस पर्व में व्रती सूर्य भगवान की पूजा कर उनसे आरोग्यता, संतान और मनोकामनाओं की पूर्ति का आर्शीवाद मांगते हैं। आज नहाय-खा के साथ इस महापर्व की शुरुआत हो गई है। भगवान भास्कर को सायंकालीन अर्घ्य 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ अनुष्ठान संपन्न होगा।

आज नहाय-खाए में व्रती लौकी की सब्जी और अरवा चावल का प्रसाद ग्रहण करेंगे। छठ में इसका खास महत्व है। वैदिक मान्यता है कि इससे पुत्र की प्राप्ति होती है तो वैज्ञानिक मान्यता है कि गर्भाशय मजबूत होता है।

 

बुधवार को खरना में कद्दू की सब्जी और चने दाल खाने की परंपरा है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो कद्दू में लगभग 96 फीसदी पानी होता है। इसे ग्रहण करने से कई तरह की बीमारियां खत्म होती हैं। वहीं चने की दाल बाकी दालों में सबसे अधिक शुद्ध है। खरने के प्रसाद में ईख का कच्चा रस, गुड़ के सेवन से त्वचा रोग, आंख की पीड़ा, शरीर के दाग-धब्बे समाप्त हो जाते हैं।

षष्ठी को पूरी तरह निराहार व निर्जला रहा जाता है। दरअसल वसंत और शरद ऋतु संक्रमण का काल माना जाता है। इसमें बीमारी का प्रकोप ज्यादा होता है। इसलिए बीमारी के प्रकोप से बचाव के लिए आराधना व उपासना पर जोर दिया गया है।

चैती छठ कार्तिक छठ की तरह ही होता है, मगर यह छोटे पैमाने पर मनाया जाता है। इसमें डाला पर ठेकुआ के साथ ही फल और मेवों का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह मूल रूप से पूर्वी भारत में मनाया जाता है, मगर दिल्ली, मुंबई जैसे भारत के अन्य शहरों में भी इसकी खासी रोनक देखने को मिलती है।
Sources:-Dainik Jagran

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