नवरात्र में ज्वाला जी के दर्शन के लिए उमड़ती है भीड़..यहां होती है 9 ज्वालाओं की पूजा

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नवरात्र चल रहे हैं ऐसे में हम आपको बता रहे हैं देवी के उन मंदिरों के बारे में जो चमत्कारी हैं। माता का एक चमत्कारी मंदिर है हिमाचल के ज्वाला जी में। जी हां ज्वाला जी या ज्वाला देवी मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठ में एक है,यह मंदिर हिमाचल की कांगरा वैली में स्थित है और धर्मशाला से 55 किलोमीटर की दूरी पर है।

ज्वाला जी का मंदिर अन्य मंदिरों की तुलना में बेहद अनोखा है। यहां मूर्ति नहीं बल्कि अपने आप जल रही नौ ज्वालाओं की पूजा की जाती है। इस मंदिर में नौ अलग अलग जगहों से ज्वाला निकल रही है और इन नौ ज्वालाओं को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी , महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है ।

इस मंदिर को ज्योति वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां पर देवी सती की जीभ गिरी थी इसीलिए इस मंदिर की गिनती 51 शक्तिपीठों में से होती है। ज्वाला देवी मंदिर सिद्ध शक्तिपीठ है और यहाँ पर हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है।

ज्वाला देवी मंदिर का इतिहास :-इस मंदिर का सबसे पहला निर्माण राजा भूमि चंद्र ने करवाया था। राजा भूमि चंद्र यह जानते थे कि यहां पर सती की जीभ गिरी थी तथा राजा भूमि चंद्र बहुत वर्षों से यह धार्मिक जगह ढूंढ रहे थे, तभी उन्हें एक चरवाहे ने उन्हें बताया कि एक पर्वत पर ज्योति जल रही। तभी राजा ने वहां जाकर दर्शन किए और उस मंदिर का निर्माण कराया। उसके बाद जब पांडव वहां पहुंचे तो उन्होंने दोबारा उस मंदिर को भव्य रूप से बनवाया।

मंदिर खुलने और आरती का समय :-गर्मी के समय : प्रातः 5 बजे, सर्दी के समय : प्रातः6 बजे। मंगल आरती : गर्मी के समय : प्रातः 5 से 6 बजे तक। सर्दी के समय : प्रातः 6 से 8 बजे तक। शाम की आरती : गर्मी के समय : शाम 7 से 8 बजे तक, सर्दी के समय : शाम 6 से 8 बजे तक। मंदिर बंद होने का समय : गर्मी के समय : रात 10 बजे, सर्दी के समय : रात 9 बजे ।

कैसे पहुंचे:- नजदीकी रेलमार्ग : पठानकोट जंक्शन 114 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है । नजदीकी हवाई अड्डा : गग्गल (धर्मशाला ) 5० किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है अथवा शिमला 160 किलोमीटर और चंडीगढ़ 200 किलोमीटर की दूरी पर है ।

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