कभी ऑफिस में सासू मां के पैर छूकर चर्चा में आई थी ये IPS

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दबंग लेडी आईपीएस और इंदौर की एसएसपी रुचि वर्धन मिश्र एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वे दो साल की बेटी नविशा को कंधे पर लेकर निरीक्षण करने को लेकर सुर्खियों में हैं। हालांकि इससे पहले वे अपनी सास के पैर छूकर पदभार संभालने को लेकर चर्चा में रही थीं। बता दें, मिश्र अपने बैच की टॉपर रही हैं। इसके साथ ही वे एक अचूक निशानेबाज भी हैं। आइए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें….

इस वजह से चर्चा में आईं मिश्र
एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र शुक्रवार रात 9 बजे जब घर पहुंचीं तो बेटी उनसे लिपट गई, उसी समय उन्हें खुड़ैल थाने के निरीक्षण के लिए जाना था। बेटी ने जिद की तो उसे भी साथ ले लिया। रात 11 बजे जब वे खुड़ैल थाने पहुंचीं तब तक बेटी सो चुकी थी। इस दौरान साथ पुलिस वालों ने कहा भी कि मैडम बेटी को हम गोद में ले लेते हैं। मिश्र की बेटी को गोद में लिए फोटो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुई। इसी वजह से वे सुर्खियों में हैं। एसएसपी मिश्र ने हाल ही में इंदौर की पहली महिला एसएसपी के तौर पर ज्वाइनिंग दी है। उनके पति शशांक मिश्र उज्जैन में कलेक्टर हैं। इंदौर में उनके साथ सास भी रहती हैं। उनकी एक बड़ी बेटी भी है।

ज्वाइनिंग के समय छूए थे सासू मां के पैर
एसएसपी मिश्र ज्वाइनिंग के वक्त कार से कलेक्टर पति शशांक, बेटे और सास के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं। वे सासू मां सरला मिश्र को खुद हाथ पकड़कर ऑफिस तक ले गईं। इस दौरान डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने उनका स्वागत किया और चार्ज सौंपा। तब एसएसपी मिश्र ने पहले सास के पैर छुए। फिर नई जिम्मेदारी संभाली। बाद में वे एडीजी वरुण कपूर के कार्यालय पहुंचीं।

2006 बैच की टॉपर और अचूक निशानेबाज
वर्ष 2006 की आईपीएस बैच की टॉपर और अचूक निशानेबाज रुचि वर्धन मूल रूप से सतना की रहने वाली हैं। सतना के सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल से पढ़ी हैं। उन्होंने जबलपुर से ग्रेजुएशन और मास्टर डिग्री दिल्ली की जवाहर लाल यूनिवर्सिटी से ली है। उनके माता-पिता सतना के ही कॉलेज में प्रोफेसर थे। उनके दादा सिविल सर्विस में थे। मिश्र की छवि एक ईमानदार और दबंग पुलिस अधिकारी की है, हालांकि वे व्यक्तिगत जीवन में काफी शांत और सरल हैं। मिश्र ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुझे शुरू से कुछ अलग करने का जुनून था। मेरा आईएएस-आईपीएस दोनों में चयन हो गया था। पहले अटैम्प्ट में आईपीएस का इंटरव्यू क्लियर किया था। आईपीएस को चैलेंजिंग जॉब मानकर इसे चुना।

शूटिंग कॉम्पिटिशन में मिले 10 में से 10 नंबर
मिश्र ने बताया था कि 2006 में वे दिल्ली में जेएनयू से एमए और एमफील की पढ़ाई के साथ यूपीएससी परीक्षा में भी सेलेक्ट हुईं। उनकी ऑल इंडिया में 67वीं रैंक थी। आईपीएस बनने के बाद 3 महीने की इंडक्शन ट्रेनिंग मसूरी में मिली। फिर हैदराबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग ली। यूपीएससी परीक्षा के नंबरों सहित दो साल की ट्रेनिंग के नंबर का टोटल मिलाने पर मिश्र को एकेडमी की बैच ऑफ टॉपर का अवॉर्ड और ट्रॉफी मिली। इसी ऑफिसर मीट में हुए शूटिंग कॉम्पिटिशन में 10 में से 10 नंबर लाकर अचूक निशाने लगाने पर उन्हें पहला अवॉर्ड मिला।

गैंग रेप के दो मामलों में 12 को सजा दिलवाने में अहम भूमिका
भोपाल में नवंबर 2016 में यूपीएससी की छात्रा से गैंगरेप मामले में जांच अधिकारी रहते हुए उन्होंने कोर्ट के आदेश पर डे-बाय-डे चैलेंज मिलने पर जांच पूरी कर चार्जशीट पेश की थी। इसमें सभी चारों आरोपियों को कोर्ट ने दिसंबर 2017 में आजीवन सजा सुनाई थी। वे भोपाल में ही रेलवे एसपी रही थीं। यहां साल 2016 में 13 वर्षीय बच्ची से आठ युवकों ने गैंगरेप किया था। आठों की गिरफ्तारी के बाद सजा दिलाने में भूमिका निभाई थी। होशंगाबाद एसपी रहने के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके काम की तारीफ भी की थी। वे राजगढ़ में भी पदस्थ रह चुकी हैं।

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