मंदिरों की नगरी है श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा, 1 बार जरूर करें इन मंदिरों के दर्शन

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भगवान श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा के बारे में कहा जाता है कि यहां कहीं भी एक पत्थर उछालों तो वो किसी न किसी मंदिर पर ही गिरता है। इसलिए मथुरा को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है।

मथुरा में श्रीकृष्ण के अनगिनत मंदिर हैं और हर मंदिर का अपना एक ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां हमेशा मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इनमें से कुछ मंदिर एकदम खास हैं, अगर आपने मथुरा में इन मंदिरों के दर्शन नहीं किए तो आपका मथुरा जाना व्यर्थ रहेगा…

कृष्ण जन्मभूमि मंदिर

श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा नगरी के बीचों बीच ही स्थ‍ित है। यहीं भगवान कृष्ण का बाल गोपाल के रूप में जन्म हुआ था। मंदिर काफी प्राचीन और भव्य है। इसकी सुंदरता देखते ही बनती है।

द्वारिकाधीश का मंदिर

मथुरा के राजा द्वारिकाधीश का मंदिर सुबह सात बजे खुल जाता है और साढ़े दस से ग्यारह के बीच बंद हो जाता है। इसी तरह शाम को भी चार बजे खुलकर सात-साढ़े सात के बीच अंतिम दर्शन हो जाते हैं। यह मथुरा और पूरे भारत में काफी प्रसिद्ध मंदिर है।

केशवदेव मंदिर

श्रीकृष्ण जन्मस्थान के निकट बना प्राचीन केशवदेव मंदिर विश्व पटल पर कई मायनों में प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि औरंगजेब के शासनकाल के दौरान, इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया था और एक ईदगाह बना दी गई थी। बाद में ब्रिटिश युग के दौरान बनारस के राजा ने यह मंदिर बनाया था।

बिड़ला मंदिर

मथुरा का बिड़ला मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मन्दिर में पंञ्चजन्य शंख एवं सुदर्शन चक्र लिए हुए श्री कृष्ण भगवान, सीताराम और लक्ष्मीनारायणजी के दर्शन होते हैं। मंदिर की दीवारों पर चित्र और उपदेशों की रचना श्रद्धालुओं का मन मोह लेती हैं।

निध‍िवन

मथुरा का निधिवन एक ऐसी जगह है, जहां के बारे में मान्यता है कि यहां कान्हा आज भी रास रचाते हैं। कान्हा के आगमन के लिए यहां मंदिर में विशेष तैयारियां भी की जाती हैं। निधिवन के आस-पास बने घरों में कोई खिड़की निधिवन की तरफ नहीं खुलती, जो खुलती हैं, उन्हें शाम की आरती का घंटा बजते ही बंद कर दिया जाता है।

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