अंधविश्वास से समाज को बचाने के लिए 16 वर्षों से चला रहे मुहिम

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जीवन में संघर्ष है लेकिन समाजसेवा से शांति व शकुन पाने वाले कुछ ऐसे भी युवा हैं, जिनके जीवन से प्रेरणा ली जा सकती है। डेढ़ दशकों से देशभर में अंधविश्वास, जादू-टोना के विरुद्ध जनजागरण अभियान चला रहे मन्टू ने अंधविश्वास जैसी बेहद ख़तरनाक बिमारी से बचाव के लिए गांवों-कस्बों व आस-पास के स्कूल- काॅलेज में जाकर वैज्ञानिक विश्लेषण व स्टेज शो करके लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने 2006 में 21 युवाओं के साथ मिलकर ‘सक्सेस साइंस फाॅर सोसाइटी’ नामक मधुबनी (बिहार) में एक सामाजिक संस्था का भी गठन किया। इसका लक्ष्य रखा, विज्ञान के माध्यम से भ्रांतियां दूर करना। इसके जरिए मन्टू जगह-जगह विज्ञान मेला व नुक्कड़ नाटक के अलावा कथित चमत्कारों की असलियत उजागर कर लोगों को जागरूक करते हैं।

इतना ही नहीं स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ व नारी सशक्तिकरण,स्लम एरिया के बच्चों का करा रहे हैं स्कुल में दाखिला का भी काम करते हैं। मन्टू का मानना हैं कि देश में लाखों लोग जादू-टोना, झाड़-फूंक के चक्कर में जान गंवा चुके हैं। वे विज्ञान के माध्यम से विश्लेषण कर लोगों को उनके चंगुल में जाने से बचाते हैं।

डेढ़ दशक से इस काम में लगे हैं मधुबनी शहर के जे.पी. काॅलोनी, सुरतगंज, वार्ड – 14 निवासी मन्टू कुमार
इसके लिए वे दर्जनों पुरस्कार पा चुके हैं। मन्टू बताते हैं कि उनके पिता रामभुषण मंडल का ज्योतिष और तंत्र-मंत्र में गहरा विश्वास था। एक बार उन्होंने सपने में देखा कि लाॅटरी का टिकट खरीदने पर वे धनवान बनने वाले हैं। फिर क्या था लाॅटरी खेलने लगे। इसकी ऐसी लत लगी कि गांव की जमीन तक बिक गई। इस घटना ने ऐसा असर डाला कि अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ठान ली।

इस कार्य को करने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर उठाते हैं खर्च :-

मन्टू डेढ़ दशक से बिना थके बिना हारे बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, दिल्ली, हरियाणा, मिजोरम, महाराष्ट्र, मिजोरम में अंधविश्वास के खिलाफ लगा चुके हैं विज्ञान जागरूकता मेला इस अभियान में लगने वाले खर्च का वहन साथियों के साथ मिलकर खुद उठाते हैं।

मन्टू अब तक 250 गांव को कर चुके हैं अंधविश्वास मुक्त , मन्टू जैसे युवा समाज के लिए एक उम्मीद हैं। मन्टू को एक अच्छी नौकरी करके अपना और अपने परिवार का पेट भर सकते हैं लेकिन मन्टू ने समाज से अंधविश्वास को जड़ से खत्म करने के लिए 16 वर्षो से समाज को अंधविश्वास मुक्त बनाने में लगे हुए हैं ।

गुरु ने दिखाई राह :-

एम.कॉम. तक की शिक्षा पाए मन्टू बताते हैं कि वे वर्ष 2006 में मंगलौर के इंडियन रैशनलिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और मेडिकल कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ.नारेंद्र नायक के संपर्क में आए। उन्होंने विज्ञान के प्रति अभिरुचि बढ़ाते हुए चमत्कारों की वैज्ञानिकता पर प्रशिक्षित किया गया। अब मन्टू लोगों को बताते हैं कि त्रिशुल को जीभ के आर-पार कर लेने वाले बाबा दरअसल अपनी जीभ में यू आकार की त्रिशुल को हाथों कि सफाई से फंसाए रहते हैं।

सड़क किनारे ग्रह-नक्षत्रों को वश में करने वाली अंगुठी बेचने वाले चुने के पानी में उस पत्थर को डुबोए रहते हैं। लोगों को चकित करने के लिए अंगुली में चालाकी से फिनोथिलीन नामक केमिकल लगाए रहते हैं। संपर्क में जैसे ही पत्थर आता है, खुन जैसा लाल रंग निकलता है। इससे लोगों को लगता है कि वह पत्थर चमत्कारी है।इसी तरह अन्य चमत्कारों की रहस्य विज्ञान के जरिए मन्टू खोलते हैं।

इनको इस काम के लिए 2006 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के द्बारा भी पुरस्कृत किया जा चुके हैं। मन्टू के इस कार्य को देखते हुए । इस साल उन्हें भारत सरकार के द्बारा राष्ट्रीय युवा पुरस्कार भी दिया गया। यह पुरस्कार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केन्द्रीय मंत्री युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री राजवर्धन सिंह राठौर के हाथों संयुक्त रूप से दिया गया है। इसके तहत प्रशस्ति-पत्र,पदक 50 हजार रूपए का चेक देकर सम्मानित किया गया।

पीएम ने विडियो कान्फ्रेंसिंग से दी थी शुभकामना:-

प्रधानमंत्री नारेंद्र मोदी ने विडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए मन्टू को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार मिलने की शुभकामना दी थी। पुरस्कृत होने पर मन्टू ने बताया कि युवा देश का भविष्य हैं। उनके कंधों पर देश का भविष्य हैं। उन्हें सामाजिक सरोकार से जुड़े गतिविधियों में रुचि रखनी चाहिए। इस क्षेत्र में भी काम करने से सामाजिक प्रतिष्ठा व शोहरत मिल सकती हैं। इसका उदाहरण बचपन बचाओ आंदोलन के कैलाश सत्यार्थी वह पाकिस्तान की युसुफ मलालाजई हैं।

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