घर की सुख-समृद्धि के लिए एकादशी की सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और शाम को दीपक जलाएं

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सोमवार, 1 अप्रैल को चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। सोमवार को शिवजी की विशेष रूप के की जाती है। एकादशी और सोमवार का योग होने से इस दिन विष्णुजी के साथ ही शिवजी की भी पूजा जरूर करें। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य का अध्याय है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने सालभर की सभी एकादशियों का महत्व युधिष्ठिर को बताया है। एकादशी पर किए जाने वाले व्रत-उपवास, पूजा-पाठ से सभी पाप नष्ट हो सकते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…

एकादशी की सुबह स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। व्रत करने वाले व्यक्ति को दिनभर अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए, अगर ये संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा किसी ब्राह्मण से करवाएंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद चरणामृत ग्रहण करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। भगवान को फूल, धूप, नैवेद्य आदि सामग्री चढ़ाएं। दीपक जलाएं। विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें। व्रत की कथा सुनें। दूसरे दिन यानी द्वादशी पर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम भी
किसी मंदिर जाएं और ध्वज यानी झंडे का दान करें। शिवजी के सामने दीपक जलाएं और श्रीराम नाम का जाप 108 बार करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, काले तिल चढ़ाएं। एकादशी पर सूर्यास्त के बाद हनुमानजी के सामने दीपक जलाएं और सीताराम-सीताराम का जाप 108 बार करें। सुबह तुलसी को जल चढ़ाएं और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं। विष्णुजी के साथ ही महालक्ष्मी की पूजा भी करें। पूजा में गोमती चक्र, पीली कौड़ी, दक्षिणावर्ती शंख अवश्य रखें।

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