खरमास में करें भगवान विष्णु की पूजा, होगी समस्त सुखों की प्राप्ति

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16 दिसंबर से खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास शुरू होने के साथ ही एक महीने के लिए सबी शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी। लेकिन क्या आपको पता है की खरमास में शुभा काम को करने की मनाही क्यों है। खरमास में धार्मिक कार्य तो होते है लेकिन शादी, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किये जाते। चलिए अब आपको समझात है कि खरमास में ऐसा क्यों किया जाता है।

वैदिक ज्योतिश में गुरु को सभी शुभ कार्यों का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। सूर्य जब गुरु की राशि धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो गुरु निस्तेज हो जाते हैं। उनका प्रभाव समाप्त हो जाता है। शुभ कार्यों के लिए गुरु का पूर्ण बली अवस्था में होना जरूरी होता है। इसलिए एक महीने के लिए शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।

खरमास के दौरा विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वाहरन खरीदना की मनाही होती है। उत्तर भारत में कुछ जगह तो नया वस्त्र तक नहीं खरीदा जाता। खरमास को मलमास भी कहा जाता है। इस मास के प्रतिनिधि आराध्या देव भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस माह में भगवान विष्णु की नियमित पूजा करनी चाहिए। इस दौरान पूजा-पाठ करने से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।

नित्य कर्म से निवृत हो कर भगवान विष्णु के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: जाप करना चाहिए। यह जाप तुलसी की माला पर करना चाहिए। पीपल के वृक्ष में नियमित जल और कच्चा दूध अर्पित करने से धन और वैभव की प्राप्ति होती ह। 16 जनवरी 2019 को सूर्य के मकर राशि में गोचर करने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इस खास दिन को मंकर संक्रांति मनाया जाता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करेत है। इसके साथ ही सभी शुभ कार्य होना प्रारंभ हो जाते है।

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