रोजी की खातिर पोस्टमार्टम हाउस में शवों की चीरफाड़ करती मंजू

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जी हां, यह भी नारीत्व का एक परिचय है। यूं तो पोस्टमार्टम हाउस में पुरुष कर्मचारियों की ही ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन बिहार के समस्तीपुर जिले में मंजू देवी बतौर सहायिका पिछले 14 सालों से शव विच्छेदन का काम कर रही हैं। उनकी अनुपस्थिति में पोस्टमार्टम का काम रुक जाता है। यही उनकी इस काम में दक्षता का प्रमाण है।

रोजाना मिलते 108 रुपये
45 वर्षीय मंजू को प्रतिदिन के हिसाब से सिर्फ 108 रुपये मिलते हैं। शव नहीं आने पर दिहाड़ी नहीं बनती। मंजू कहती हैं, दिहाड़ी तभी मिलती है, जब शव आता है। पैसे का भुगतान भी समय पर नहीं होता…। नौकरी स्थायी करने को लेकर मंजू कई बार गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन बात बनी नहीं।

13 हजार पोस्‍टमार्टम में कर चुकी सहयोग
मंजू के ससुर रामजी मल्लिक बतौर चतुर्थवर्गीय कर्मचारी पोस्टमार्टम हाउस में चीरफाड़ का काम करते थे। 1994 में उनकी मृत्यु के बाद पत्नी भोला देवी को रखा गया। वर्ष 2001 में पति की मौत के बाद मंजू भी सास के साथ जाने लगीं। धीरे-धीरे काम सीख लिया। 2004 में सास की मौत के बाद मंजू को पोस्टमार्टम का काम सौंपा गया। तब से अब तक वे 13 हजार से अधिक पोस्टमार्टम कर चुकी हैं।

अभी तक अनसुनी दिहाड़ी की गुहार

मंजू ने दिहाड़ी बढ़वाने व स्थायी कर देने के लिए चिकित्सकों और अस्पताल अधीक्षक से कई बार गुहार लगाई। लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्होंने वर्ष 2008 में डीएम व सीएस के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। 2009 में न्यायालय ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया।

काम में दक्ष है मंजू
बहरहाल, मामला अब जिला प्रशासन के पास लंबित है। अपर समाहर्ता (स्थापना) बाल मुकुंद प्रसाद का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन होगा। पोस्टमार्टम में साथ रहने वाले सदर अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ सह चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. डीके शर्मा का कहना है कि मंजू अपने काम में दक्ष हैं।

समस्तीपुर के सिविल सर्जन डॉ. विवेकानंद झा बतो हैं कि मंजू सदर अस्पताल में पिछले 14 साल से पोस्टमार्टम में सहयोग कर रही हैं। उन्हें दैनिक मजदूरी का भुगतान होता है। वे बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।

बेटा चलाता म्‍यूजिक सेंटर
मंजू का बेटा दीपक भी इस काम में मदद करता है। इंटर के बाद उसने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से शास्त्रीय संगीत में एमए की डिग्री हासिल की। अब म्यूजिक ट्रेनिंग सेंटर भी चलाता है।

Sources:-Dainik Jagran

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