‘जब पटना हाईकोर्ट के जज लेते हैं पड़ोसी के घर से पानी, तो आमलोग की क्या कहें’

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‘जब जज को शुद्ध पेय जल की आपूर्ति नहीं हो पाती है, तो आम जनों की क्या दुर्दशा होती होगी, यह सोचने वाली बात है।’ यह तल्ख टिप्पणी पटना हाईकोर्ट की है। हाईकोर्ट ने पेयजल आपूर्ति को नियमित कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी बुधवार को की। इसके साथ ही पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के अंदर सूबे को पेयजल आपूर्ति की विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

शुद्ध पेयजल एवं आर्सेनिक मुक्त जल की निर्बाध आपूर्ति के लिए दायर याचिका पर न्यायाधीश ज्योति सरन एवं न्यायाधीश अरविंद श्रीवास्तव की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई की। न्यायाधीश सरन ने कहा कि पानी का तो यह हाल है कि उनके आवास में नियमित रूप से पानी नहीं मिल पाता हैै। उन्हें पानी के लिए पड़ोसी का सहारा लेना पड़ता है।

खंडपीठ ने पेयजल से जुड़े अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि निर्बाध पेयजल आपूर्ति के लिए यदि कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो संबंधित अधिकारियों को रोजाना कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ेगा।

छात्र संगठन एआइएसएफ की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार ने लोकहित याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि प्रदेश के लोगों को आर्सेनिक युक्त पानी पीना पड़ता है। राज्य के 11 जिलों की 892 बस्तियों में आर्सेनिक युक्त पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इससे लोग बीमार हो रहे हैं। इस पर खंडपीठ ने सूबे के सभी नगर निगम एवं नगर विकास विभाग से जवाब मांगा।
Sources:-Dainik Jagran

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