उरी द सर्जिकल स्ट्राइक:सैनिकों के प्रति सम्मान और देशभक्ति का जज्बा जगाती है फिल्म

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स्टार रेटिंग: 3.5/5
स्टारकास्ट: विक्की कौशल, यामी गौतम, परेश रावल, मोहित रैना, कीर्ति कुल्हारी
डायरेक्टर: आदित्य धर
प्रोड्यूसर: रॉनी स्क्रूवाला
म्यूजिक: शास्वत सचदेव
जॉनर: एक्शन
रनिंग टाइम: 2 घंटे 7 मिनट

उरी 2016 में इंडियन आर्मी के द्वारा पाकिस्तानी आतंकवादी ठिकानों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित है। जो उरी बेस कैंप में भारतीय सैनिकों पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले का बदला था। इस ऑपरेशन टीम का नेतृत्व विहान सिंह शेरगिल (विक्की कौशल) कर रहा है, जो देशभक्ति और व्यक्तिगत कारणों से प्रेरित है।
फिल्म उरी की खास बातें

निर्देशक आदित्य धर शुरुआत में विहान के चरित्र को स्थापित करते हैं। जो कि बहादुर और अपनी यूनिट का पसंदीदा है। विहान कार्रवाई से दूर होने का विकल्प चुनता है, क्योंकि वह अल्जाइमर से पीड़ित अपनी मां के साथ कुछ समय बिताना चाहता है। उसका दोस्त और बहनोई कैप्टन करण कश्यप (मोहित रैना) भी सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए आगे रहता है। जल्द ही, अपने निजी जीवन में होने वाली घटनाओं का एक दुखद मोड़ विहान को सर्जिकल हमले का हिस्सा बनते हुए सीमा पर वापस जाने के लिए मजबूर करता है।

डोभाल जैसा दिखने परेश ने की मेहनत

इस मिशन के लिए विशेष रूप से चुने जाने के अलावा मदद के लिए उनके पास दो महिलाएं पल्लवी शर्मा (यामी गौतम) और जसकीरत (कीर्ति कुल्हारी) हैं। ऑपरेशन के मास्टरमाइंड पीएम के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार गोविंद (परेश रावल) हैं। परेश रावल ने अजित डोभाल की तरह दिखने के लिए मेहनत की है और वे अच्छा काम करते हैं। दिग्गज अभिनेता रजित कपूर प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रहे हैं और यह चरित्र पीएम नरेंद्र मोदी पर आधारित है।

कसा हुआ है निर्देशन

निर्देशक को इसका श्रेय जाता है कि वह युद्ध के दृश्यों को यथासंभव यथार्थवादी बनाए रखता है, और एक्शन दृश्यों को कसा हुआ रखता है जो आपको पूरे समय बांधकर रखते हैं। कुछ सीन तो बहुत ही अच्छे हैं जिसमें दर्शक जो स्क्रीन पर चल रहा है उसमें पूरी तरह इनवॉल्व हो जाते हैं। फिल्म का पहला हाफ शानदार है लेकिन दूसरा भाग निराश करता है क्योंकि यह अनुमानित लगता है और एक कसे हुए कथानक से दूर ले जाता है।

यह है फिल्म का प्लस पॉइंट

युद्ध के दृश्यों को अंजाम देते समय धर ने कोई कसर नहीं छोड़ी है और यह फिल्म आपको युद्ध के खतरों के प्रति जागरूक करती है और यही इसके लिए बड़ा प्लस पॉइंट है।


हर एक्टर दमदार और परफैक्ट

मेजर की भूमिका में विक्की कौशल शानदार हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से भूमिका में फिट होने के लिए खुद को उभारा है और वे इस रोल में एकदम सही लग रहे हैं। एक कमजोर स्थिति से गुजरते हुए भी उनका फौलादी आचरण, उनके द्वारा निभाए जाने वाले चरित्र की आंतरिक शक्ति को दर्शाता है। मोहित रैना भी उनके निभाए गए किरदार की तरह दिखते हैं और अच्छा समर्थन देते हैं। यामी और कीर्ति के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं है, लेकिन उनके द्वारा निभाए जाने वाले पात्रों में वे एकदम फिट बैठती हैं।



इसलिए देखें फिल्म

इस फिल्म को ज़रूर देखें क्योंकि ड्रोन सहित आधुनिक युद्ध हथियारों से परिचित होने के बाद भी एक्शन दृश्य आपको बांधे रखते हैं। उस रात सीमा पर वास्तव में क्या हुआ था, यह कहानी अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकती है या नहीं भी हो सकती है, लेकिन फिल्म उन वास्तविक खतरों की बारीकी से झलक देती है जो सैनिकों के सामने हर दिन आते हैं।
Sources:-Dainik Bhasakar

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