आखिर विराट कोहली की कौन सी बात उन्हें दूसरे क्रिकेटर्स से अलग बनाती है ?

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विश्व क्रिकेट के अलग-अलग दौर में अलग-अलग खिलाड़ियों का बोलबाला रहा। कभी सर डॉन ब्रैडमेन ने अपने बल्ले से कामयाबी की नई इबारत लिखी तो कभी सर विवियन रिचर्ड्स इस खेल को बुलंदियों तक पहुंचाते रहे। इसके बाद भी गावस्कर से लेकर तेंदुलकर तक सभी ने जो शोहरत पाई अब उसी राह पर मौजूदा भारतीय कप्तान विराट कोहली सरपट भाग रहे हैं।

कई पूर्व दिग्गज इस बात को मान चुके हैं कि दुनिया की सबसे अच्छी फीलिंग विराट को बल्लेबाजी करते देखना है। उच्च तकनीक, बेहतरीन शॉट चयन और गजब की आक्रामकता के साथ अद्भुत संयम कोहली को ‘विराट’ बनाता हैं।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी पांच मैच की घरेलू वन-डे सीरीज में दो लगातार शतक के साथ (44+116+123) 283 रन बना चुके इस दाएं हाथ के बल्लेबाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों इतनी जल्दी उनकी गिनती दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में होने लगी।

रन नहीं रिकॉर्ड मशीन बने कोहली
रांची में खेले गए तीसरे वन-डे में भले ही टीम इंडिया को 32 रन से हार मिली, लेकिन अपना 41वां शतक लगाने वाले कोहली ने एक बार फिर सभी का दिल जीत लिया। एक ओर से जहां विशाल लक्ष्य के आगे तमाम दिग्गज घुटने टेकते नजर आए तो दूसरी ओर कोहली किसी योद्धा की तरह अकेले लड़ते रहे।

95 गेंदों में 123 रन की अपनी पारी के दौरान वे जब तक पिच पर रहे कंगारुओं पर दबाव बना रहा। पहले धोनी के साथ 59 रन की साझेदारी की फिर केदार जाधव के साथ 88 रन जोड़े तो बाद में विजय शंकर के साथ तेज 45 रन बनाए। इस दौरान विराट ने कप्तान के तौर पर सबसे तेज 4 हजार रन पूरे किए। इससे पहले सबसे तेज हजार, दो हजार और तीन हजार रन भी दिल्ली के इस खिलाड़ी के ही नाम थे।

सचिन तेंदुलकर ने जहां 41 शतक बनाने के लिए 369 पारियां खेली थी तो विराट ने केवल 217 पारियों में ही यह कमाल कर लिया। विराट जिस रफ्तार से बढ़ रहे हैं, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि वे ‘भगवान’ के 49 शतकों का रिकॉर्ड इसी साल ही तोड़ दें।

कोहली का यह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 8वां शतक था। भारत में 19वां। एशिया में 28वां और बतौर कप्तान 19वां। 2017 से अबतक यह खिलाड़ी 15 वन-डे शतक लगा चुका है, जबकि इस दौरान पूरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने मिलकर इतने शतक लगा पाई। पाक ने 14, बांग्लादेश ने 13 और विंडीज के खाते में 12 शतक ही आ पाए।

विराट में आखिर क्या खास है ?
साधना में लीन किसी साधु की तरह सिर्फ अपने खेल में ध्यान देकर दुनिया की परवाह न करने वाले विराट की सफलता कुंजी क्या है? टीम इंडिया के सहायक कोच संजय बांगड़ मानते हैं कि विराट कोहली खुद को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करते रहते हैं और यही बात उन्हें खास बनाती है। लगातार बेहतर की चाह ही है जो कप्तान विराट कोहली को सबसे अलग बनाती है। इसी वजह से कोहली इस दौर के अन्य खिलाड़ियों से काफी आगे भी हैं।

एथलीट की तरह ट्रेनिंग करो, न्यूट्रिनिस्ट की तरह खाओ, बच्चे की तरह नींद लो और चैंपियन की तरह खेलो- यह वो मंत्र है जिसका विराट न सिर्फ खुद अनुसरण करते हैं बल्कि टीम को इसी फॉर्मूले पर चलना सीखा रहे हैं।

कभी खाने के शौकिन रहे विराट आज दुनिया के सबसे फिट प्लेयर्स में से एक हैं। उन्होंने न केवल खुद की फिटनेस पर काम किया बल्कि साथी प्लेयर्स को भी इसके लिए प्रेरित किया। एक दौर था जब भारतीय टीम अपनी फिल्डिंग के लिए बदनाम थी। आज मैन इन ब्लूज की गिनती विश्वस्तरीय फिल्डर्स में होती है।

नि:संदेह विराट एक महान खिलाड़ी बन चुके हैं, लेकिन कप्तान के तौर पर मैदान पर या उसके बाहर लिए गए फैसले हमेशा से लोगों को चौंकाते रहे हैं। विराट ने कई बार प्लेइंग इलेवन और कॉम्बिनेशन से एक्सपर्ट्स तक को हैरान कर दिया। वे लगातार अलग-अलग इलेवन के साथ मैदान पर उतरे। इसे लेकर आलोचना हुई, लेकिन आज नतीजा सभी के सामने हैं, विश्व कप को लेकर अब इस टीम के पास इतने लायक खिलाड़ी हैं जो भारत की काबिलियत को ही दर्शाता है।

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